Sunday, October 25, 2015

यादों का सफर

जज़्बात की आंधी सूखे पत्तों को
महका जाती है 
बीते लम्हों की कसक जब
पलकों पर छलक आती है
यादों की थाम उंगली बेचैन रूह
टूटे खण्डहर में समां जाती है           
गुजरे लम्हों की दास्तां यादों के पन्ने
पलट जाती है
जिंदगी की किताब जब अलमारी से
निकल आती है
बजाते ही सोच का साज चुपके-चुपके
अल्हड़-शोख़ शरारतों की वीणा
पत्थर जिस्म को हरक़त की हंसी
दे जाती है
हृदय-पटल के तबले पर जब यादों की थाप
पड़ जाती है
जो छूट गया वो साथ,जो बीत गया वो पल
जो बिखर गए वो मोती,जो तन्हा रह गया वो वज़ूद
ख़ामोश रूह तन्हा ही सफर उन गलियारों का
कर आती है
कुछ अधूरे ख़्वाब,कुछ अनकही फ़रियाद
कुछ ढके-मुदे राज,कुछ खुशनुमा अहसास
सबको यादों की कश्ती में कर सवार
उम्र की लहरें वक़्त के समुन्दर में
गोतें लगा आती हैं  
दूरियों के भंवर में जब मिलन की झंकार
कसमसाती है    
एक टीस तड़प के पोरों से नस-नस में
पिघल जाती है
बीते लम्हों की कसक जब पलकों पर
छलक आती है  

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