Wednesday, October 7, 2015

टूटा दिल

वो मिल भी जाये तो क्या
बिछुड़ना तो फिर भी होगा
अब ये अलग बात है कि
कोई पहले कोई बाद में रुखसत होगा

घिस-घिस कर नफरत को उसने
एक बारूद बना दिया
ये भी न सोचा कि इससे
आशियाँ उसका ही राख होगा

बांट-जोहते बहारों की
बहुत दूर चले आये हम
मुड़कर देखा तो पाया
उजड़ चुका जो चमन वो
फिर न गुलजार होगा

समां चुकी है जो रूह तक
उसकी बेवफाई की खुशबू
कितना भी छिड़क ले
अब इत्र बेगुनाही का वो
सूँघने वालों को अब न कोई एतबार होगा 

बहुत लुफ्त आता है किसी के
दिल को देके दर्द-औ-तड़प
मगर कभी ये सोचा नहीं
जो लुढ़क आया है उसके गालों पर
वो भी तो अश्क तुम्हारा होगा

जला के हसरतें दफ़ना के जज्बात
मिटा के मोहब्बत लुटा के खुशियाँ
लो आके बैठ गये पहलू  में वो
पल भर भी उन्हें यह एहसास नहीं
बुझी राख में अब न कोई अंगार होगा

फ़ना हो जायेगे हम उनकी बेरुखी से या रब
ख़ौफ-जदा होता है दिल मगर ये सोचकर
जब होगा हक़ीकत से उनका सामना    
वो खुद अपने वजूद पर शर्मसार होगा

बार-बार चोट लगने से
पत्थर भी फ़ना हो जाता है
ये तो इक दिल है टूटकर इसमें
फिर न किसी मूरत का बसेरा होगा

रुसवा हुई मायूस धड़कनों
यूँ दिल दुखाने से न कुछ हांसिल होगा
जो फिसल गया है तकदीर के हाथों से
वो मुकद्दर न तुम्हारा होगा

चाँद ने समझा है दर्द
तन्हाइयों ने टटोली है नब्ज़
टूटते तारों से आयी है सदा
दम तोड़ चुकी मोहब्बत का
अब न जनम दोबारा होगा         

No comments:

Post a Comment