एहले गुरूर मैंने कितने सावन तेरी नज़र कर दिए
इस दिल को बारिश में भीगने का अधिकार न था
मैं नज़रों के तीर लिए उम्र भर बैठी रही
कोई भी निशाना उसके सीने के पार न था
उसके दिल मे सुराख करके मोहब्बत को निकाल लाये
मेरा कोई भी खंज़र इतना धारदार न था
उसने ले रखे हैं बेशुमार मोहब्बतों के उधार गैरों से
तभी वो मेरी वफ़ा का कर्ज़दार न था
मैंने कभी घर छोड़ा नही उसने कभी रोका नहीं
इतना ज़हर पी जाउंगी मैं हालात ने कभी सोचा न था
वो बना रहा उम्रभर गैरों का ही खिदमदगार
उसे मेरी वफ़ा पर कभी एतबार न था
अब तो ख़्वाबों ने भी उम्मीदों का दामन छोड़ दिया हैं
टूटते सितारों को कभी अम्बर को तकना न था
इस दिल को बारिश में भीगने का अधिकार न था
मैं नज़रों के तीर लिए उम्र भर बैठी रही
कोई भी निशाना उसके सीने के पार न था
उसके दिल मे सुराख करके मोहब्बत को निकाल लाये
मेरा कोई भी खंज़र इतना धारदार न था
उसने ले रखे हैं बेशुमार मोहब्बतों के उधार गैरों से
तभी वो मेरी वफ़ा का कर्ज़दार न था
मैंने कभी घर छोड़ा नही उसने कभी रोका नहीं
इतना ज़हर पी जाउंगी मैं हालात ने कभी सोचा न था
वो बना रहा उम्रभर गैरों का ही खिदमदगार
उसे मेरी वफ़ा पर कभी एतबार न था
अब तो ख़्वाबों ने भी उम्मीदों का दामन छोड़ दिया हैं
टूटते सितारों को कभी अम्बर को तकना न था
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