हम धोखे के खंजर
अपनी पीठ पर खाए बैठे हैं
कहीं उड़ न जाएं उसकी
बेवफाइयों के चर्चे
हम खामोशियों के दरिया में
खुद को डुबोये बैठे हैं
चेहरे पर मुस्कराहट का
नकाब डाल निकलते हैं घर से
कही उफन न जाये गालों पर
गम का सागर हम दिल के
जज़्बातों को चट्टानों से टकराये बैठे हैं
भीतर की उदासी कहीं खोल न दे
तहखानों की कुण्डी हम दिल की
हसरतों पर पहरा लगाये बैठे हैं
गलतफहमियों का जंगल भड़का न दे
कही नफरत के शोलों को
हम बारिश की बूंदों को
पलकों पर संजोएं बैठे हैं
तू न सही तेरा अक्स ही सही
हम पिघलती मोम को हथेलियों
में छुपाये बैठे हैं
जलते हुए अरमानो से
पिघल जायेगा हिमालय
इसी उम्मीद का दिया चौखट
पर जलाये बैठे हैं
अपनी पीठ पर खाए बैठे हैं
कहीं उड़ न जाएं उसकी
बेवफाइयों के चर्चे
हम खामोशियों के दरिया में
खुद को डुबोये बैठे हैं
चेहरे पर मुस्कराहट का
नकाब डाल निकलते हैं घर से
कही उफन न जाये गालों पर
गम का सागर हम दिल के
जज़्बातों को चट्टानों से टकराये बैठे हैं
भीतर की उदासी कहीं खोल न दे
तहखानों की कुण्डी हम दिल की
हसरतों पर पहरा लगाये बैठे हैं
गलतफहमियों का जंगल भड़का न दे
कही नफरत के शोलों को
हम बारिश की बूंदों को
पलकों पर संजोएं बैठे हैं
तू न सही तेरा अक्स ही सही
हम पिघलती मोम को हथेलियों
में छुपाये बैठे हैं
जलते हुए अरमानो से
पिघल जायेगा हिमालय
इसी उम्मीद का दिया चौखट
पर जलाये बैठे हैं
हम चाहत की लकड़ी से
उम्र का चूल्हा जलाये बैठे है
कभी तो पकेंगी मोहब्बत की रोटियां
हम अरमानों का थाल सजाये बैठे हैं
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