गर रोशनी न छिटके आफ़ताब की
हम गर्दिशी-अंधेरों में समा जायें
गर आंच न तापें जज्बात की
हम तन्हा ही ठिठुर जायें
चन्द पल जो गुजार आते हैं
दोस्तों के साथ
उम्र की सीढ़ियाँ चढ़ने को मिल जाता है
इक सीढ़ी का साथ
गर इन्तजार न हो डूबते चाँद का
हम धूप से खिली चाँदनी में फिर कैसे नहायें
बनाकर सिरहाना
सुनहरे पल की कपास का
टिका देते है सारे गम
बोझिल पलकों से
गर रात न सुनाये तराना निःश्चल प्रेम का
हम ख़्वाबों के छल्ले फिर कैसे उड़ायें
अश्कों के समुन्दर में
फ़रियाद की छाँव तले
लो आके बैठ गये हम
मायूसियों को ढांपकर
ठंडी रेत के आगोश तले
गर पवन न दे पाये अपनियत का किनारा
हम डूबते दिल को फिर कैसे बचायें
दिल के तहखाने में समेटकर
बिखरी यादों के पन्नें
भटक जाते हैं
अल्हड़ बचपन की गलियों में
गर खोल न पाये ख़ुशी उदासी की साँकड़
हम लुप्त हुये अलंकार में मोती कैसे सजायें
हम गर्दिशी-अंधेरों में समा जायें
गर आंच न तापें जज्बात की
हम तन्हा ही ठिठुर जायें
चन्द पल जो गुजार आते हैं
दोस्तों के साथ
उम्र की सीढ़ियाँ चढ़ने को मिल जाता है
इक सीढ़ी का साथ
गर इन्तजार न हो डूबते चाँद का
हम धूप से खिली चाँदनी में फिर कैसे नहायें
बनाकर सिरहाना
सुनहरे पल की कपास का
टिका देते है सारे गम
बोझिल पलकों से
गर रात न सुनाये तराना निःश्चल प्रेम का
हम ख़्वाबों के छल्ले फिर कैसे उड़ायें
अश्कों के समुन्दर में
फ़रियाद की छाँव तले
लो आके बैठ गये हम
मायूसियों को ढांपकर
ठंडी रेत के आगोश तले
गर पवन न दे पाये अपनियत का किनारा
हम डूबते दिल को फिर कैसे बचायें
दिल के तहखाने में समेटकर
बिखरी यादों के पन्नें
भटक जाते हैं
अल्हड़ बचपन की गलियों में
गर खोल न पाये ख़ुशी उदासी की साँकड़
हम लुप्त हुये अलंकार में मोती कैसे सजायें
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