बहुत उड़ाया है सतरंगी इन्द्रधनुष
मुखौटों के साथ
चलो एक होली अंतस की
गहराई से खेलें
वृत्ति को थमायें भाव
की डिबिया
इन्द्रियों को चखायें संवेदनाओं
की गुझिया
चलो एक स्वाद जीवंतता का
चख लेँ
बहायें आनंद का सैलाब
लगायें सौहार्द का गुलाल
चलो विचारों की यातना के बांध
तोड़ कर जीलें
निश्चल प्रेम के पोखर में झूमकर
डूबें
स्वयं के हालात पर मुग्ध हो
रीझें
चलो छल कपट वैमनस्य शत्रुता की
भांग घोंट कर पीलें
उतारें अहम की खुरचन
लगायें धैर्य का उबटन
चलो कालुष की काया को
रगड़कर धोलें
जलायें खण्डित व्यक्तित्व की
होली
सजायें निष्कपट फूलों की
रंगोली
चलो कृष्ण की मुरली भ्रमित अधरों
पर धर लें
समाये फ़ाग नस-नस में
बिखरे गुलाल घर-घर में
चलो एक धुन दिलों के
राग से बुन लें
लगायें अनुराग का चन्दन
मह्काये प्रीत से तन-मन
चलो एक चांदनी का उजाला
उत्सव की मांग में भर लें
मुखौटों के साथ
चलो एक होली अंतस की
गहराई से खेलें
वृत्ति को थमायें भाव
की डिबिया
इन्द्रियों को चखायें संवेदनाओं
की गुझिया
चलो एक स्वाद जीवंतता का
चख लेँ
बहायें आनंद का सैलाब
लगायें सौहार्द का गुलाल
चलो विचारों की यातना के बांध
तोड़ कर जीलें
निश्चल प्रेम के पोखर में झूमकर
डूबें
स्वयं के हालात पर मुग्ध हो
रीझें
चलो छल कपट वैमनस्य शत्रुता की
भांग घोंट कर पीलें
उतारें अहम की खुरचन
लगायें धैर्य का उबटन
चलो कालुष की काया को
रगड़कर धोलें
जलायें खण्डित व्यक्तित्व की
होली
सजायें निष्कपट फूलों की
रंगोली
चलो कृष्ण की मुरली भ्रमित अधरों
पर धर लें
समाये फ़ाग नस-नस में
बिखरे गुलाल घर-घर में
चलो एक धुन दिलों के
राग से बुन लें
लगायें अनुराग का चन्दन
मह्काये प्रीत से तन-मन
चलो एक चांदनी का उजाला
उत्सव की मांग में भर लें
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