दर्द को बीनकर रंज का सफ़ाया कर दिया
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इस किरदार को कितना बेगाना कर दिया
सींचकर पौध समाज के ढकोसलों की
काटते गये फसलें पीढ़ियों की हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इस जड़ को कितना खोखला कर दिया
छुपाकर खुद को तसल्ली के पर्दों में
चुरा बैठे नज़रें हक़ीक़त से हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक सच से कितना फासला कर लिया
सब्र तकता रहा चाँद और चांदनी
जुल्फों से छलक आयी
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तिलिस्मी संसार अपने नाम कर लिया
अब उम्र की साँझ पर रुह को
झुलसाना ठीक नहीं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
सही-गलत से खुद को जुदा कर लिया
दीदार उजालों का हो ये
गुफाओं को मंज़ूर नहीं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक अंधेरा रौशनी की नज़र कर दिया
ये लकीरें मेरी नहीं तमाम हथेलियों की हैं
ये आरजुएं मेरी नहीं तमाम बुतों की हैं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तिरस्कार मुक़द्दर की भेंट कर दिया
तुझको पाने की चाहत में
ख़ुद को ही मिटा बैठे हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तआल्लुक़ अपना फ़ना कर दिया
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इस किरदार को कितना बेगाना कर दिया
सींचकर पौध समाज के ढकोसलों की
काटते गये फसलें पीढ़ियों की हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इस जड़ को कितना खोखला कर दिया
छुपाकर खुद को तसल्ली के पर्दों में
चुरा बैठे नज़रें हक़ीक़त से हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक सच से कितना फासला कर लिया
सब्र तकता रहा चाँद और चांदनी
जुल्फों से छलक आयी
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तिलिस्मी संसार अपने नाम कर लिया
अब उम्र की साँझ पर रुह को
झुलसाना ठीक नहीं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
सही-गलत से खुद को जुदा कर लिया
दीदार उजालों का हो ये
गुफाओं को मंज़ूर नहीं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक अंधेरा रौशनी की नज़र कर दिया
ये लकीरें मेरी नहीं तमाम हथेलियों की हैं
ये आरजुएं मेरी नहीं तमाम बुतों की हैं
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तिरस्कार मुक़द्दर की भेंट कर दिया
तुझको पाने की चाहत में
ख़ुद को ही मिटा बैठे हम
ऐ ,घरौंदे तेरे इश्क़ में हमने
इक तआल्लुक़ अपना फ़ना कर दिया
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