Friday, September 30, 2016

माँ ने छुपाया आँचल में
और सारा दर्द सीने में उड़ेल लिया
चैन के पल्लू में खोंसकर मुझको
खुद बेचैनी का दोशाला ओढ़ लिया ------------------
आगे की कविता मेरी प्रथम पुस्तक 'रोटियां तपने दो'
में पढ़कर मुझे स्नेह दीजिये पुस्तक मिलने का पता ---------
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Wednesday, September 28, 2016

विदाई बेटी की

वो हठ,वो किलकारियाँ,वो लड़कपन,
वो शरारत,वो अठखेलियाँ
सब गुजरे जमाने की बात होगी  
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी

वो प्रथम उच्चारण,वो प्रथम पग
वो प्रथम उपलब्धि,वो प्रथम पहचान 
उस आलौकिक सुख की तिजोरी,मेरे पास होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी ,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी

वो हथेली की मेहंदी,वो खनकती चूड़ियां
वो लाज का घूँघट,वो माथे की बिंदिया
वो लब पे दुआओं की,बरसात होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी

वो सखा-बन्धु का बिछोह,वो गलियों का मोह
वो मम्मी-पापा की झिड़कियां,वो लोरी की थपकियां
साथ सब यादों की, बारात होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी

वो दो घरों की लाज,वो रिश्तों की बुनियाद
वो संस्कारों का लिबास,वो समर्पण का विश्वास
वो मेरी शिक्षा की चूनर,डगमगाहट की ढ़ाल होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी

वो प्रीतम का साथ,वो ससुराल का उल्लास
वो रूप-गुण का पलाश,वो मधुर स्वप्निल बयार
वो नवीन-उमंगों की चांदनी,तुम्हारे द्वार होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी
                  
वो जुदाई की हूक,वो डर का अहसास
वो भ्रम की बदली,वो अनिश्चिन्ताओं का मकड़जाल
पग फेरे के आगमन से ही, जिया में बौछार होगी
उठेगी जब डोली तुम्हारी,झूमेगा मन
पर धड़कनों में न स्वांश होगी   

Sunday, September 18, 2016

My first publication "Rotiyan Tapne Do" is now available online. I wish to thank all my readers for their continuous support.

The book is available at the given link-

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